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क्या है?
Public Safety Act: इसके बारे में यहां जाने सबकुछ
जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और अन्य के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत 06 फरवरी 2020 को मामला दर्ज कर लिया गया है. ये दोनों नेता जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पिछले छह महीने से नजरबंद थे. यह कानून सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक बिना मुकदमे गिरफ्तारी या नजरबंदी की अनुमति देता है.
पिछले साल उमर अब्दुल्ला के पिता फारुख अब्दुल्ला को भी इस एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला को राज्य प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत बंदी बना लिया गया था. वे पीएसए के तहत बंदी बनाए जाने वाले राज्य पहले पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद हैं. फारुख अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब 05 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था.
क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए)?
सरकार सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है. यह कानून जम्मू कश्मीर में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने साल 1978 में लागू किया था.
इस कानून को तत्कालीन सरकार द्वारा लाने का मुख्य उद्देश्य लकड़ी की तस्करी को रोकना बताया गया था. इस कानून के तहत किसी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को सही तरह से बनाए रखने के मद्देनजर वहां नागरिकों के आने-जाने पर रोक लगा दी जाती हैं.
यह कानून सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हो. यह कानून सरकार को 16 वर्ष से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना दो साल की �
By -- gagandeeppendu22
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क्या है?
Public Safety Act: इसके बारे में यहां जाने सबकुछ
जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और अन्य के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत 06 फरवरी 2020 को मामला दर्ज कर लिया गया है. ये दोनों नेता जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पिछले छह महीने से नजरबंद थे. यह कानून सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला देते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक बिना मुकदमे गिरफ्तारी या नजरबंदी की अनुमति देता है.
पिछले साल उमर अब्दुल्ला के पिता फारुख अब्दुल्ला को भी इस एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला को राज्य प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत बंदी बना लिया गया था. वे पीएसए के तहत बंदी बनाए जाने वाले राज्य पहले पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद हैं. फारुख अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब 05 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था.
क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए)?
सरकार सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है. यह कानून जम्मू कश्मीर में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने साल 1978 में लागू किया था.
इस कानून को तत्कालीन सरकार द्वारा लाने का मुख्य उद्देश्य लकड़ी की तस्करी को रोकना बताया गया था. इस कानून के तहत किसी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को सही तरह से बनाए रखने के मद्देनजर वहां नागरिकों के आने-जाने पर रोक लगा दी जाती हैं.
यह कानून सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हो. यह कानून सरकार को 16 वर्ष से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना दो साल की �
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